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यहां दाढ़ी मूंछ स्वरूप में दर्शन देते हैं भगवान श्रीराम और लक्ष्मण
भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण लाल वनवास के दौरान उज्जयिनी नगरी से गुजरे जिसके पुराणों में अनेक प्रमाण मिलते हैं।
वन गमन के दौरान भगवान श्रीराम और लक्ष्मणजी की दाढ़ी मूंछ वाली मूर्तियां भारत वर्ष में सिर्फ दो स्थानों पर स्थित हैं जिनमें से एक स्थान उज्जैन है। कार्तिक चौक स्थित बूढ़ा राम मंदिर में भगवान दाढ़ी मूंछ स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
कार्तिक चौक स्थित जगन्नाथ मंदिर के ठीक पास स्थित है बूढ़ा राम मंदिर। यहां के पुजारी महंत ओमप्रकाश निर्वाणी बताते हैं कि उनकी 37 वीं पीढ़ी इस मंदिर में पूजन और सेवा कार्य कर रही है।
निर्वाणी के अनुसार चंद्रगुप्त द्वितीय द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार कराने के प्रमाण मिलते हैं, लेकिन यह मंदिर उससे कितना पुराना है इसकी जानकारी हमें भी नहीं।
मंदिर में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की मूर्तियां वन गमन के दौरान दाढ़ी व मूंछ में साथ ही माता सीता के एक हाथ में जलपात्र व दूसरे हाथ में चंवर है। भगवान श्रीराम की मूर्ति श्याम है जो पूरे देश में उज्जैन के अलावा नासिक में स्थित है।
नासिक में काले राम के नाम से भगवान को पूजा जाता है। राम नवमी पर प्रतिवर्ष मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालु दर्शनों को आते हैं, लेकिन इस वर्ष कोरोना संक्रमण की वजह से मंदिर में आम लोगों का प्रवेश वर्जित किया गया है। हालांकि भगवान का जन्मोत्सव, श्रृंगार, पूजन आदि प्रतिवर्ष की तरह ही होगा।
हनुमानजी मानव स्वरूप में
बूढ़ा राम मंदिर में ही हनुमानजी की ऐसी मूर्ति विराजित है जिसमें भगवान मानव स्वरूप में दिखाई देते हैं। पुजारी निर्वाणी बताते हैं कि इस मूर्ति में किशकिंधा नगरी में भगवान श्रीराम लक्ष्मण से हनुमानजी ब्राम्हण वेश धारण कर मानव स्वरूप में मिले थे। उसी वर्णन के अनुसार संभवत: पूरे भारत वर्ष में हनुमानजी की इस प्रकार की एकमात्र मूर्ति मंदिर में विराजित है।
